ADABI SANGAM -# 553_------------TOPIC GULAB -------SEPTEMBER-26-2026
उस दिन रोज मर्रा की तरह बाग़ में मॉर्निंग वाक को निकला तो वहां एक बहुत बड़ी कियारी में गुलाब के कतार में लगे हुए गुलाब के पौधे और उनपे सजे हुए रंग बिरंगे हर तरह के गुलाब के फूल
लाल सुर्ख गुलाब ,कोई जंगल का राजा है तो कोई पाताल का लेकिन बागों और रोमांटिक दिलों का राजा तो लाल गुलाब का फूल ही है , ऐसा लोग मानते हैं।
टहनिया झुकती हुई और तितलियाँ उड़ती हुई , छूने को दिल किया " लिखा था तोडना मना है " जी मचल के बोला पर देखना कहाँ मना है ?फिर कुछ कांटो ने स्वागत किया , यार इतने सुब्दर फूल और यह जालिम कांटे ?
कांटे सिर्फ पहरेदार नहीं इस सुंदरता के बल्कि खुश्क सर्द मौसम में यही कांटे हवा से पानी चूस कर फूलों को ताज़ा भी रखते है ,
बुरी सरिष्ट न बदली जगह बदलने से , चमन में काँटा आके भी गुलाब न हो सका , गुलाब को प्यार करने वालो कांटो से भी नाता रखना पड़ेगा
सुना है दुनिया में अब पुराना इश्क कहीं भी मिला नहीं करता
गुलाब के इत्र से महकता तो है पर शायद खिला नहीं करता
," कैसे हो भैया ? की आवाज से मैंने चौंक कर पीछे मुड कर देखा वहां कोई न था , फिर वही आवाज तुम्हारे दादा जी पिता जी सब ही तो यहाँ आते थे मैं सब को जानता हूँ , यह गुलाब का बगीचा उनकी वजह से था उन्ही के पैसों से। आप तो बहुत कम आते हैं। कहीं नौकरी करते हैं ? नहीं काम ढून्ढ रहा हूँ मैंने भी बिना सोचे समझे जवाब दे दिया , कोतुहल तो यह था के आवाज कहाँ से आई थी ? शायद कोई दोस्त आसपास में होगा यही सोचकर कर मुँह से जवाब निकल गया , मैंने पलट कर देखा ,लेकिन वहां कोई भी तो नहीं था.
गुलाब और रंग नजदीक से देखने और उनकी सुगंध का आभास करने के लिए मैं थोड़ा झुका ही था केक्यारी की गीली दलदल में पैर फिसला और उसी पौधे पे जा गिरे ,कांटे चुभे ,थोड़ा खून बहा ,कपडे फटे सो अलग , हुस्न के पहरेदार भी तो होते हैं ऐसे कैसे तोड़ लोगे किसी खूबसूरत चीज़ को ? फिर वही आवाज आई
मुझे तो खैर कांटे जो चुभे सो चुभे , बेचारा मेरे वजन से उस पौधे का कचूमर ही निकल गया , सब टहनिया टूट गई फूल भी टूट कर बिखर गए , मेरे कपडे भी कीचड में पूरी तरह सन चुके थे , मैंने इधर उधर देखा उस बाग का माली दौड़ता हुआ मेरे पास आया , पूछ क्या हुआ साहब ? कैसे हुआ ? फूल चाहिए थे तो हम से मांग लेते। नहीं भाई ऐसा कुछ नहीं है , कुछ आवाज का भ्रम हो गया था ,
माली के जाते ही फिर आवाज आई , अब मैं तो टूट फुट गया हूँ माली मुझे कचरे में फेंक देगा , माली से कह कर आप मुझे यहाँ से ले चलो मुझे अपने घर चलना है , भाई कौन हो कहाँ से बोल रहे हो ? कौन सा घर ? जरा गौर से सुनने की कोशिश की तो वो उस टूटे हुए गुलाब के पौधे से आती हुई जान पड़ी , मन ने कहा पौधे कहाँ बोलते हैं ? , यह क्या भ्रम है कौन फैला रहा है इसे? ,कोई छुपा हुआ स्पीकर तो नहीं इस पार्क में ? कोई मुझे मूर्ख बना रहा है या भूत का डर दिखा रहा है? पर है कौन नजर भी तो नहीं आ रहा
आप मुझे यहाँ से ले चलो।, फिर आवाज आई, तुम आजकल बेकार हो ना? मैं तुम्हे कमाई करवाऊंगा। मैंने माली को आवाज लगाई और पूछा, भाई , तुम्हें भी कुछ सुनाई दी आवाज ? माली ने कहा, साहब, क्यों सुबह-सुबह मजाक करते हो पौधे भला क्या बोलेंगे ? तो यह टूटा हुआ पौधा अब किस काम आएगा ? कुछ नहीं, सुबह इसे निकालकर दूसरा लगाना पड़ेगा , तो यह टूटा हुआ मुझे दे दो। आप जाइए। मैंने आपका घर देखा है वहां आकर मैं लगा दूंगा।
फिर मुझे आभास हुआ जैसे कोई कह रहा हो भाई मेरी कुछ सुनते जाओ फिर वही आवाज , मैं गुलाब हूँ मेरे कई भाई भी है , हर रंग अलग ही पहचान देते है , हैरान मत होइए हमें हर कोई नहीं सुन सकता , आपकी जिंदगी में सुबह से शाम तक मैं आपका कितना साथ देता हूँ है आपको कुछ भी याद ?,
मैंने पुछा वो कैसे , सुबह पार्क में मेरे दर्शन करने चले आते हो ताज़ी ऑक्सीजन में मेरी खुशबू सिर्फ आपको ही नहीं कितनी ही तितलियाँ और भंवरो को खींच लाती है , वह जो शहद सुबह आप नाश्ते में लेते हो अपने स्वास्थ्य के लिए , शरीर की सुंदरता और चंचलता के लिए ?वे मक्खियाँ मेरी मिठास ही लेकर पौष्टिक शहद बनाती हैं. तुम्हें पैदा होते ही यही शहद चटाकर इस दुनिया की सबसे मीठी याद दी थी तुम्हारे पिताजी ने ?,भूल गए अपनी छट्टी का दूध और शहद की वो बूँद जो मेरे ही रस से बनी थी ?
आपने पूजा अर्चना की हवंन करवाए सब जगह मैं ही तो मौजूद था ,आपके घर में हुए हर जनम से मृत्यु शया तक जरा सोचो कहाँ नहीं था मैं ? मैं चुपचाप सुनता रहा
इत्र से नहीं, वफ़ा से महकता है हमारे बीच का रिश्ता
इंसान का प्यार वक्त के साथ सूख जाता है और रिश्तों को भूल जाता है
लेकिन एक गुलाब सूख भी जाए तो खुशबू नहीं छोड़ता!अखिर तक साथ निभाता है
लाल सुर्ख गुलाब ,कोई जंगल का राजा है तो कोई पाताल का लेकिन बागों और रोमांटिक दिलों का राजा तो लाल गुलाब का फूल ही है , ऐसा लोग मानते हैं।
टहनिया झुकती हुई और तितलियाँ उड़ती हुई , छूने को दिल किया " लिखा था तोडना मना है " जी मचल के बोला पर देखना कहाँ मना है ?फिर कुछ कांटो ने स्वागत किया , यार इतने सुब्दर फूल और यह जालिम कांटे ?
कांटे सिर्फ पहरेदार नहीं इस सुंदरता के बल्कि खुश्क सर्द मौसम में यही कांटे हवा से पानी चूस कर फूलों को ताज़ा भी रखते है ,
बुरी सरिष्ट न बदली जगह बदलने से , चमन में काँटा आके भी गुलाब न हो सका , गुलाब को प्यार करने वालो कांटो से भी नाता रखना पड़ेगा
सुना है दुनिया में अब पुराना इश्क कहीं भी मिला नहीं करता
गुलाब के इत्र से महकता तो है पर शायद खिला नहीं करता
," कैसे हो भैया ? की आवाज से मैंने चौंक कर पीछे मुड कर देखा वहां कोई न था , फिर वही आवाज तुम्हारे दादा जी पिता जी सब ही तो यहाँ आते थे मैं सब को जानता हूँ , यह गुलाब का बगीचा उनकी वजह से था उन्ही के पैसों से। आप तो बहुत कम आते हैं। कहीं नौकरी करते हैं ? नहीं काम ढून्ढ रहा हूँ मैंने भी बिना सोचे समझे जवाब दे दिया , कोतुहल तो यह था के आवाज कहाँ से आई थी ? शायद कोई दोस्त आसपास में होगा यही सोचकर कर मुँह से जवाब निकल गया , मैंने पलट कर देखा ,लेकिन वहां कोई भी तो नहीं था.
गुलाब और रंग नजदीक से देखने और उनकी सुगंध का आभास करने के लिए मैं थोड़ा झुका ही था केक्यारी की गीली दलदल में पैर फिसला और उसी पौधे पे जा गिरे ,कांटे चुभे ,थोड़ा खून बहा ,कपडे फटे सो अलग , हुस्न के पहरेदार भी तो होते हैं ऐसे कैसे तोड़ लोगे किसी खूबसूरत चीज़ को ? फिर वही आवाज आई
मुझे तो खैर कांटे जो चुभे सो चुभे , बेचारा मेरे वजन से उस पौधे का कचूमर ही निकल गया , सब टहनिया टूट गई फूल भी टूट कर बिखर गए , मेरे कपडे भी कीचड में पूरी तरह सन चुके थे , मैंने इधर उधर देखा उस बाग का माली दौड़ता हुआ मेरे पास आया , पूछ क्या हुआ साहब ? कैसे हुआ ? फूल चाहिए थे तो हम से मांग लेते। नहीं भाई ऐसा कुछ नहीं है , कुछ आवाज का भ्रम हो गया था ,
माली के जाते ही फिर आवाज आई , अब मैं तो टूट फुट गया हूँ माली मुझे कचरे में फेंक देगा , माली से कह कर आप मुझे यहाँ से ले चलो मुझे अपने घर चलना है , भाई कौन हो कहाँ से बोल रहे हो ? कौन सा घर ? जरा गौर से सुनने की कोशिश की तो वो उस टूटे हुए गुलाब के पौधे से आती हुई जान पड़ी , मन ने कहा पौधे कहाँ बोलते हैं ? , यह क्या भ्रम है कौन फैला रहा है इसे? ,कोई छुपा हुआ स्पीकर तो नहीं इस पार्क में ? कोई मुझे मूर्ख बना रहा है या भूत का डर दिखा रहा है? पर है कौन नजर भी तो नहीं आ रहा
आप मुझे यहाँ से ले चलो।, फिर आवाज आई, तुम आजकल बेकार हो ना? मैं तुम्हे कमाई करवाऊंगा। मैंने माली को आवाज लगाई और पूछा, भाई , तुम्हें भी कुछ सुनाई दी आवाज ? माली ने कहा, साहब, क्यों सुबह-सुबह मजाक करते हो पौधे भला क्या बोलेंगे ? तो यह टूटा हुआ पौधा अब किस काम आएगा ? कुछ नहीं, सुबह इसे निकालकर दूसरा लगाना पड़ेगा , तो यह टूटा हुआ मुझे दे दो। आप जाइए। मैंने आपका घर देखा है वहां आकर मैं लगा दूंगा।
फिर मुझे आभास हुआ जैसे कोई कह रहा हो भाई मेरी कुछ सुनते जाओ फिर वही आवाज , मैं गुलाब हूँ मेरे कई भाई भी है , हर रंग अलग ही पहचान देते है , हैरान मत होइए हमें हर कोई नहीं सुन सकता , आपकी जिंदगी में सुबह से शाम तक मैं आपका कितना साथ देता हूँ है आपको कुछ भी याद ?,
मैंने पुछा वो कैसे , सुबह पार्क में मेरे दर्शन करने चले आते हो ताज़ी ऑक्सीजन में मेरी खुशबू सिर्फ आपको ही नहीं कितनी ही तितलियाँ और भंवरो को खींच लाती है , वह जो शहद सुबह आप नाश्ते में लेते हो अपने स्वास्थ्य के लिए , शरीर की सुंदरता और चंचलता के लिए ?वे मक्खियाँ मेरी मिठास ही लेकर पौष्टिक शहद बनाती हैं. तुम्हें पैदा होते ही यही शहद चटाकर इस दुनिया की सबसे मीठी याद दी थी तुम्हारे पिताजी ने ?,भूल गए अपनी छट्टी का दूध और शहद की वो बूँद जो मेरे ही रस से बनी थी ?
आपने पूजा अर्चना की हवंन करवाए सब जगह मैं ही तो मौजूद था ,आपके घर में हुए हर जनम से मृत्यु शया तक जरा सोचो कहाँ नहीं था मैं ? मैं चुपचाप सुनता रहा
इत्र से नहीं, वफ़ा से महकता है हमारे बीच का रिश्ता
इंसान का प्यार वक्त के साथ सूख जाता है और रिश्तों को भूल जाता है
लेकिन एक गुलाब सूख भी जाए तो खुशबू नहीं छोड़ता!अखिर तक साथ निभाता है
एक गुलाब करले निबाह बेइन्ताह कांटो से ,
पर एक आदमी ही है जो निभा न सका आदमी से,
मौका कोई भी हो ? एक बात बताओ
गुलाब पर ही जुल्म क्यों ढाते हैं लोग ? इश्क के इज़हार या किसी की मजार के लिए हमें ही क्यों तोड़ लाते हैं लोग ?
ज्यादा गलत फेहमी में रहते हैं यह , , अगर गुलाब देने से ही मोहब्बत हो जाती , या किसी की लाश पे गुलाब देने से मुक्ति ? तो माली सारे शहर का महबूब न हो जाता ? मेरा सुर्ख लाल रंग तुम्हें खून की याद नहीं दिलाता ? जिस मेहबूबा को एक फूल दे दो तो कितने ही विलन पैदा हो जाएंगे तुम्हारे खून बहाने के लिए , आज तक जितने भी गुलाब लिए या दिए गए किसी एक का भी घर शांति से बसा ?
गुलाब पर ही जुल्म क्यों ढाते हैं लोग ? इश्क के इज़हार या किसी की मजार के लिए हमें ही क्यों तोड़ लाते हैं लोग ?
ज्यादा गलत फेहमी में रहते हैं यह , , अगर गुलाब देने से ही मोहब्बत हो जाती , या किसी की लाश पे गुलाब देने से मुक्ति ? तो माली सारे शहर का महबूब न हो जाता ? मेरा सुर्ख लाल रंग तुम्हें खून की याद नहीं दिलाता ? जिस मेहबूबा को एक फूल दे दो तो कितने ही विलन पैदा हो जाएंगे तुम्हारे खून बहाने के लिए , आज तक जितने भी गुलाब लिए या दिए गए किसी एक का भी घर शांति से बसा ?
फूल सिर्फ किताबों में सूखकर दम तोड़ गए , फूल तुम्हें भेजा है खत में फूल नहीं मेरा दिल है तो क्या उस उजड़े दिल की दुनिया उस एक फूल से बसी ? मेरे जो गुण हैं, उन्हें कोई नहीं जानता सिवाय पुरानी पीढ़ी के, लेकिन आज की जनरेशन उनकी सुनती ही कहाँ है ? मुझे एक-दूसरे को पटाने में नष्ट किया जा रहा है मेरे सारे गुणों को अपने पांव तले रौंदते हुए आगे बढ़ जाते हैं जबकि मुझे ईश्वर ने अमरत्व का दान दिया है मेरे बीज की बजाय मेरी एक टूटी हुई शाख लगा दे मैं फिर से जिन्दा हो जाता हूँ
मेरी सूखी पत्तियों से कितने ही तरह के सुंगधित परफ्यूम बनाये जाते है , तुम्हारी शादी की स्टेज मेरे ही फूलों से सजाई गई थी , भूल गए अपनी सुहाग रात में मुझे कितना मसल दिया था अपने बिस्तर पर बिछा के क्योंकि आपको अपने हर काम में मेरी सुगंध अच्छी लगती है ,आयुर्वेद में गुलाब गुलकंद आपके पेट की बीमारियों में एक राम बाण दवाई है , आँखें दुःख रही हों तो गुलाब जल से आँखों के रोग ठीक हो जाते है , मैं हैरानी से सब सुन रहा था मेरी आवाज मानो बिलकुल गुमसुम सी हो गई थी ( अंदर ही अंदर मेरा दिल गवाही दे रहा था के बात तो बिलकुल सच्च है , जो कभी हमने ध्यान ही नहीं दिया ,पर यह बता कौन रहा था? कितना बिज़नेस छुपा था इस गुलाब के एक फूल में ? मैं सोच में पड़ गया 'आवाज फिर भी आती रही -----
कीमती तोहफों से बेहतर है, किसी को एक लाल गुलाब का फूल देना , तोहफों में लाख नुक्स निकाल देंगे कीमत को लेकर यह लोग, लेकिन प्यार की निशानी लाल फूल को क्या कहेंगे ?
सुनो कि अब आज से हम गुलाब लेंगे और गुलाब देंगे
मोहब्बत में कोई अब खासरा नहीं चलेगा
मोहब्बत के बाजार में , तभी से चल पड़ा रिवाज हर मौके पर गुलाबों का आदान प्रदान और बेचारे गुलाब के बागों की शामत आ गई , बेचारे तेज नोकीले कांटे भी इंसान से इन खूबसूरत गुलाबों को बचा नहीं पाए , यह दुनिया तो ख़ूबसूरती की वैसे भी दुश्मन है ,बिज़नेस के नाम पर जहाँ देखती हैं झपटने की कोशिश करती है
मेरी सचाई के इतर लोगो के लिए गुलाब सिर्फ़ एक खूबसूरत फूल नहीं, बल्कि प्यार, खूबसूरती, एहसास और रिश्तों की गहराई का प्रतीक भी है। उन खूबसूरत भावनाओं को शब्दों में व्यक्त करने का एक शानदार तरीका है, जिन्हें हम अक्सर सीधे कह नहीं पाते। गुलाब की खुशबू और उसकी नज़ाकत को आधार बनाकर लिखी गई शायरी प्रेम, रोमांस, दोस्ती और दिल की भावनाओं को बेहद खूबसूरती से बयां करती है।लाल गुलाब अगर प्यार की निशानी है तो सफेद गुलाब शांति का प्रतीक , और काला गुलाब विद्रोह या BYCOT का अगर लोग अँधा धुंद मेरे फूलों को इतना रुतबा दे रहे हैं तो तुम भी कुछ फायदा उठा लो मुझ से
उसने भी तो यही कहा था अपनी शादी हो जाने के बाद
"कागज़ के पन्नों में दबाकर रखी है तेरी दी हुई हर निशानी
ये सूखा गुलाब सुनाता है हमारी अधूरी मोहब्बत की कहानी!!
मेरे दिल ने जवाब दिया ,
मेरी सूखी पत्तियों से कितने ही तरह के सुंगधित परफ्यूम बनाये जाते है , तुम्हारी शादी की स्टेज मेरे ही फूलों से सजाई गई थी , भूल गए अपनी सुहाग रात में मुझे कितना मसल दिया था अपने बिस्तर पर बिछा के क्योंकि आपको अपने हर काम में मेरी सुगंध अच्छी लगती है ,आयुर्वेद में गुलाब गुलकंद आपके पेट की बीमारियों में एक राम बाण दवाई है , आँखें दुःख रही हों तो गुलाब जल से आँखों के रोग ठीक हो जाते है , मैं हैरानी से सब सुन रहा था मेरी आवाज मानो बिलकुल गुमसुम सी हो गई थी ( अंदर ही अंदर मेरा दिल गवाही दे रहा था के बात तो बिलकुल सच्च है , जो कभी हमने ध्यान ही नहीं दिया ,पर यह बता कौन रहा था? कितना बिज़नेस छुपा था इस गुलाब के एक फूल में ? मैं सोच में पड़ गया 'आवाज फिर भी आती रही -----
कीमती तोहफों से बेहतर है, किसी को एक लाल गुलाब का फूल देना , तोहफों में लाख नुक्स निकाल देंगे कीमत को लेकर यह लोग, लेकिन प्यार की निशानी लाल फूल को क्या कहेंगे ?
सुनो कि अब आज से हम गुलाब लेंगे और गुलाब देंगे
मोहब्बत में कोई अब खासरा नहीं चलेगा
मोहब्बत के बाजार में , तभी से चल पड़ा रिवाज हर मौके पर गुलाबों का आदान प्रदान और बेचारे गुलाब के बागों की शामत आ गई , बेचारे तेज नोकीले कांटे भी इंसान से इन खूबसूरत गुलाबों को बचा नहीं पाए , यह दुनिया तो ख़ूबसूरती की वैसे भी दुश्मन है ,बिज़नेस के नाम पर जहाँ देखती हैं झपटने की कोशिश करती है
मेरी सचाई के इतर लोगो के लिए गुलाब सिर्फ़ एक खूबसूरत फूल नहीं, बल्कि प्यार, खूबसूरती, एहसास और रिश्तों की गहराई का प्रतीक भी है। उन खूबसूरत भावनाओं को शब्दों में व्यक्त करने का एक शानदार तरीका है, जिन्हें हम अक्सर सीधे कह नहीं पाते। गुलाब की खुशबू और उसकी नज़ाकत को आधार बनाकर लिखी गई शायरी प्रेम, रोमांस, दोस्ती और दिल की भावनाओं को बेहद खूबसूरती से बयां करती है।लाल गुलाब अगर प्यार की निशानी है तो सफेद गुलाब शांति का प्रतीक , और काला गुलाब विद्रोह या BYCOT का अगर लोग अँधा धुंद मेरे फूलों को इतना रुतबा दे रहे हैं तो तुम भी कुछ फायदा उठा लो मुझ से
उसने भी तो यही कहा था अपनी शादी हो जाने के बाद
"कागज़ के पन्नों में दबाकर रखी है तेरी दी हुई हर निशानी
ये सूखा गुलाब सुनाता है हमारी अधूरी मोहब्बत की कहानी!!
मेरे दिल ने जवाब दिया ,
बेशक दिलों में आग, हाथों में गुलाब रखते हैं,
मेरे चाहने वाले भी अब तो -------
अपने चेहरों पर दोहरी नक़ाब रखते हैं।
मेरे चाहने वाले भी अब तो -------
अपने चेहरों पर दोहरी नक़ाब रखते हैं।
सोचो कितने गुलाब क़त्ल हुए होंगे तेरे इश्क़ को मनाने में,
के गुलशन को उजाड़ कर हुस्न को सजाया गया था
कितने शौक से दूल्हे के सर सेहरा भी मेरा ही सजाया गया था , और जब तू किसी के काम का न रहा
और फिर क्या कम बाग़ उजड़े होंगे तेरी मयद को सजाने में ?
इतना ज्ञान इस गुलाब के टूटे हुए पौधे से कैसे ?और
सिखा रहा है यह गुलाब मुझे जिंदगी का सलीका
कांटों के बीच रहकर भी मुस्कुराने का तरीका!?
पत्नी जोर जोर से चिल्लाये जा रही थी , कितनी देर से उठा रही हूँ , कुम्भकरण की नींद सोये हो , मैं एक झटके में उठा आँख मलते हुए बोला ,यार क्या अजीब सपना था , गुलाबों का बाग मेरे कपडे गंदे होना , मेरा गिरना , माली से बात करना , अरे हाँ माली तो सुबह सुबह ही आया था पिताजी के बारे में पूछ रहा था और एक गुलाब का पौधा हमारे पीछे के लॉन में लगा कर गया है , पिताजी के बारे में?
अरे भाग्यवान यह क्या मिस्ट्री हो रही है , पिताजी को गए हुए भी आज बीस साल बीत चुके हैं , हम दोनों भाग कर अपने लॉन में उस पौधे को देखने आये तो वहां गुलाब का पूरा जंगल बन चूका था , एक पौधा नहीं था , अब हमें काटो तो खून नहीं , यह कोई भूतिया पौधा है क्या ?हमें डर लगने लगा। एक रात में इतना घना जंगल ? भगवान किस मुसीबत में फंस गए है हम लोग , काट के फैंको सारे गुलाब के जंगल को सुबह ही , कल ही माली को बुलाता हूँ, पार्क के ऑफिस में माली को बुलाने के लिए फ़ोन किया तो उन्होंने बताया इस नाम का माली हमारे यहां कभी था ही नहीं न ही कोई आपके घर पे भेजा गया है आपको कोई गलत फेहमी हुई है आप किसी नर्सरी की बात तो नहीं कर रहे ?
तभी दरवाजे पर दस्तक हुई गुलाब सिंह जी घर पे हैं ? बहार एक विदेशी सज्जन खड़े थे मैंने दरवाजा खोल कर बोला "पिताजी तो बीस साल पहले ही इस दुनिया से जा चुके हैं " आप कौन और कहाँ से आये हो और आप पिताजी के दोस्त हो तो आप पहले कभी यहाँ आये हो क्या ?नहीं कभी नहीं आया
मैं भी काफी मुसीबत में था मेरी पत्नी चल बसी , स्टोर में आग लगी , बिज़नेस में बहुत घाटा हुआ और मैं भी दिल का दौरा पड़ा बीमार पड़ गया था, सारा फूलों का बिज़नेस ख़त्म हो गया था , लेकिन insured था
क्लेम पास हुआ लेकिन आपके पिता जी की अमानत पिछले बीस साल से बैंक में रखी थी ,उनसे कोई कनेक्शन नहीं था 'इसी पैसे की वजह से मेरा काम फिर से फल फूल गया है,वो मेरे बिज़नेस पार्टनर ही नहीं भाई की तरह थे जब मेरे पास कुछ भी ना था उन्होंने मुझे उधार में फूल देकर मुझे खड़ा किया था। यह कहते हुए उसने अपनी जेब से एक लाख डॉलर का चेक निकालकर मेरे हाथ में थमा दिया ,
के गुलशन को उजाड़ कर हुस्न को सजाया गया था
कितने शौक से दूल्हे के सर सेहरा भी मेरा ही सजाया गया था , और जब तू किसी के काम का न रहा
और फिर क्या कम बाग़ उजड़े होंगे तेरी मयद को सजाने में ?
इतना ज्ञान इस गुलाब के टूटे हुए पौधे से कैसे ?और
सिखा रहा है यह गुलाब मुझे जिंदगी का सलीका
कांटों के बीच रहकर भी मुस्कुराने का तरीका!?
पत्नी जोर जोर से चिल्लाये जा रही थी , कितनी देर से उठा रही हूँ , कुम्भकरण की नींद सोये हो , मैं एक झटके में उठा आँख मलते हुए बोला ,यार क्या अजीब सपना था , गुलाबों का बाग मेरे कपडे गंदे होना , मेरा गिरना , माली से बात करना , अरे हाँ माली तो सुबह सुबह ही आया था पिताजी के बारे में पूछ रहा था और एक गुलाब का पौधा हमारे पीछे के लॉन में लगा कर गया है , पिताजी के बारे में?
अरे भाग्यवान यह क्या मिस्ट्री हो रही है , पिताजी को गए हुए भी आज बीस साल बीत चुके हैं , हम दोनों भाग कर अपने लॉन में उस पौधे को देखने आये तो वहां गुलाब का पूरा जंगल बन चूका था , एक पौधा नहीं था , अब हमें काटो तो खून नहीं , यह कोई भूतिया पौधा है क्या ?हमें डर लगने लगा। एक रात में इतना घना जंगल ? भगवान किस मुसीबत में फंस गए है हम लोग , काट के फैंको सारे गुलाब के जंगल को सुबह ही , कल ही माली को बुलाता हूँ, पार्क के ऑफिस में माली को बुलाने के लिए फ़ोन किया तो उन्होंने बताया इस नाम का माली हमारे यहां कभी था ही नहीं न ही कोई आपके घर पे भेजा गया है आपको कोई गलत फेहमी हुई है आप किसी नर्सरी की बात तो नहीं कर रहे ?
तभी दरवाजे पर दस्तक हुई गुलाब सिंह जी घर पे हैं ? बहार एक विदेशी सज्जन खड़े थे मैंने दरवाजा खोल कर बोला "पिताजी तो बीस साल पहले ही इस दुनिया से जा चुके हैं " आप कौन और कहाँ से आये हो और आप पिताजी के दोस्त हो तो आप पहले कभी यहाँ आये हो क्या ?नहीं कभी नहीं आया
मैं भी काफी मुसीबत में था मेरी पत्नी चल बसी , स्टोर में आग लगी , बिज़नेस में बहुत घाटा हुआ और मैं भी दिल का दौरा पड़ा बीमार पड़ गया था, सारा फूलों का बिज़नेस ख़त्म हो गया था , लेकिन insured था
क्लेम पास हुआ लेकिन आपके पिता जी की अमानत पिछले बीस साल से बैंक में रखी थी ,उनसे कोई कनेक्शन नहीं था 'इसी पैसे की वजह से मेरा काम फिर से फल फूल गया है,वो मेरे बिज़नेस पार्टनर ही नहीं भाई की तरह थे जब मेरे पास कुछ भी ना था उन्होंने मुझे उधार में फूल देकर मुझे खड़ा किया था। यह कहते हुए उसने अपनी जेब से एक लाख डॉलर का चेक निकालकर मेरे हाथ में थमा दिया ,
यह पैसा आपके पिताजी का भी मेरे साथ फंस गया था मेरे पास आपका नया एड्रेस नहीं था सो काफी पूछताछ, पोस्ट ऑफिस से यह पता मिला तो आपसे मिलने चला आया , मैं जर्मनी में फूलों का बिज़नेस करता हूँ , तुम्हारे पिताजी गुलाब के फूलों के बहुत बड़े एक्सपोर्टर थे , हमें भेजा करते थे , बड़ी मांग है भारत के गुलाबों की वहां।
मैं उसे हैरानी से देख रहा था मेरी पत्नी को भी कुछ समझ नहीं आ रहा था , मैंने अपनी आँखे मली के यह क्या बयान हो रहा है , अचानक एक विदेशी इतना बड़ा चेक लेकर हमारे गरीब घर पे दस्तक दे रहा है जिसे न हमने कभी देखा न ही पिताजी ने कभी बताया , मुझे तो यह कोई क्राइम थ्रिलर जैसी फील दे रहा है , हमने उसे अविश्वास से देखते हुए बोला चलो अंदर चाय पे बाकी बातें करते है , लेकिन उसने बाहर ही बैठने का आग्रह किया तो हम उसे बैक लॉन में ले गए जहाँ गुलाब के जंगल को देख उछल पड़ा अरे इतने सूंदर फूल यही तो तुम्हारे पिताजी हमें भेजा करते थे यही तो मुझे लेना है , सारा माल मुझे दे दो इसके पैसा भी आपको वापिस जर्मनी पहुँचते ही भिजवा दूंगा।
अरे, मुझे कोई चूंटी काटो, यह हकीकत कैसे हो सकता है? एक पौधा एक रात इतना कैसे फल गया के सारा लॉन ही घिर गया ,इतना सस्पेंस तो किसी फिल्म में भी नहीं होता , ऊपर से यह चेक ?लेकिन यह चेक तो बैंक में डालने से पता चलेगा किसी विदेशी बैंक का है इसमें पैसा है भी या कोई फ्रॉड ?हमें उल्लू बना रहा है , पत्नी ने समझाते हुए बोला , इतनी देर में वह सज्जन बिना चाय पीये ही बोले मुझे बहुत काम है जल्दी वापिस भी जाना है , टेक केयर
कुछ ना बोलकर भी वो सब कुछ कह गए
जब वो हाथों में हमारा एक गुलाब लेकर, मुस्कुरा कर चल दिए !!
तीन दिन बाद बैंक मैनेजर का फ़ोन आया और बैंक में बुलाया पुछा आपका अकाउंट तो काफी समय से inoperative था इसमें इतनी बड़ी रकम का अचानक आना हमें शक पैदा कर रहा है , क्या है यह पैसा जो विदेश से आया है , हमें हेड ऑफिस को बताना है , आइये इन डाक्यूमेंट्स पर sign कीजिये और कल अपने सारे identity proof लेकर आ जाईये
मैं उसे हैरानी से देख रहा था मेरी पत्नी को भी कुछ समझ नहीं आ रहा था , मैंने अपनी आँखे मली के यह क्या बयान हो रहा है , अचानक एक विदेशी इतना बड़ा चेक लेकर हमारे गरीब घर पे दस्तक दे रहा है जिसे न हमने कभी देखा न ही पिताजी ने कभी बताया , मुझे तो यह कोई क्राइम थ्रिलर जैसी फील दे रहा है , हमने उसे अविश्वास से देखते हुए बोला चलो अंदर चाय पे बाकी बातें करते है , लेकिन उसने बाहर ही बैठने का आग्रह किया तो हम उसे बैक लॉन में ले गए जहाँ गुलाब के जंगल को देख उछल पड़ा अरे इतने सूंदर फूल यही तो तुम्हारे पिताजी हमें भेजा करते थे यही तो मुझे लेना है , सारा माल मुझे दे दो इसके पैसा भी आपको वापिस जर्मनी पहुँचते ही भिजवा दूंगा।
अरे, मुझे कोई चूंटी काटो, यह हकीकत कैसे हो सकता है? एक पौधा एक रात इतना कैसे फल गया के सारा लॉन ही घिर गया ,इतना सस्पेंस तो किसी फिल्म में भी नहीं होता , ऊपर से यह चेक ?लेकिन यह चेक तो बैंक में डालने से पता चलेगा किसी विदेशी बैंक का है इसमें पैसा है भी या कोई फ्रॉड ?हमें उल्लू बना रहा है , पत्नी ने समझाते हुए बोला , इतनी देर में वह सज्जन बिना चाय पीये ही बोले मुझे बहुत काम है जल्दी वापिस भी जाना है , टेक केयर
कुछ ना बोलकर भी वो सब कुछ कह गए
जब वो हाथों में हमारा एक गुलाब लेकर, मुस्कुरा कर चल दिए !!
तीन दिन बाद बैंक मैनेजर का फ़ोन आया और बैंक में बुलाया पुछा आपका अकाउंट तो काफी समय से inoperative था इसमें इतनी बड़ी रकम का अचानक आना हमें शक पैदा कर रहा है , क्या है यह पैसा जो विदेश से आया है , हमें हेड ऑफिस को बताना है , आइये इन डाक्यूमेंट्स पर sign कीजिये और कल अपने सारे identity proof लेकर आ जाईये
दुसरे दिन हमने बैंक को सब प्रूफ दिए और एक गुलाब का फूल भी , जनाब इसी गुलाब के बिज़नेस का एक्सपोर्ट आर्डर का एडवांस मिला है यह चेक , अब हैरान होने की बारी मैनेजर की थी, ऐसा क्या है इस गुलाब में जो इतना बड़ा एडवांस भी मिल गया ? हम क्या बोलते कोई यकीन ही न करता सो चुपचाप उठकर चल दिए
ना कोई शिकवा, ना कोई शिकायत की, हमने भी
बस एक गुलाब उसे भी देकर दिल की हर बात कह दी!!
यह एक ऐसी घटना थी जो मेरे एक मित्र के साथ घटी जो दिल्ली के एक गांव में रहता था और उसने मुझे सुनाई ,हमने उसे मनघँडत और तिलस्मी माना लेकिन उसका गुलाबों का व्यपार खूब फैला फूला हुआ था यह तो हमें मालूम था ,उसने अपना नाम तक गुलाब सिंह रख डाला था ' लगभग ४०-४५ साल पुरानी है यह घटना ,उसके मरने तक उसका फूलों का व्यपार बहुत बड़ा था लेकिन उसके मरते ही उन फूलों की रौनक भी ख़त्म हो गई, सब पेड़ सूख गए थे जिस चमत्कारित ढंग से वो पूरा बाग बना था उसी तरह से ख़त्म भी। यूरोप से आर्डर आने भी बंद हो गए उसके बच्चो को इन फूलों के बिज़नेस पे कोई विश्वास ही नहीं जमा उन्हों ने उस बाग और मकान को बेच दिया और किसी बड़े शहर में जाकर बस गए जिसका आज तक कोई अता पता ही नहीं है , हमें आज तक न ही कोई ऐसी कहानी दुबारा सुनाई पड़ी है न ही ऐसे कोई चमत्कार
अब तो ---- सिर्फ यह सोच दिल में बैठी है के क्या सच में ऐसा हो सकता है ?के गुलाब के फूल में बसी कोई आत्मा जिसका उस परिवार से कोई नाता था ?जो उसके मरने पे टूट गया ? लेकिन कुछ समझ नहीं आया सिवाय इसके की -----
ज़िन्दगी है ही गुलाबों की तरह एक अनबुझ कहानी जैसे,
संवर गई तो ठीक
वरना एक ठोकर ,बिखर जाएंगी जिंदगी की पंखुड़ी सारी
ना कोई शिकवा, ना कोई शिकायत की, हमने भी
बस एक गुलाब उसे भी देकर दिल की हर बात कह दी!!
यह एक ऐसी घटना थी जो मेरे एक मित्र के साथ घटी जो दिल्ली के एक गांव में रहता था और उसने मुझे सुनाई ,हमने उसे मनघँडत और तिलस्मी माना लेकिन उसका गुलाबों का व्यपार खूब फैला फूला हुआ था यह तो हमें मालूम था ,उसने अपना नाम तक गुलाब सिंह रख डाला था ' लगभग ४०-४५ साल पुरानी है यह घटना ,उसके मरने तक उसका फूलों का व्यपार बहुत बड़ा था लेकिन उसके मरते ही उन फूलों की रौनक भी ख़त्म हो गई, सब पेड़ सूख गए थे जिस चमत्कारित ढंग से वो पूरा बाग बना था उसी तरह से ख़त्म भी। यूरोप से आर्डर आने भी बंद हो गए उसके बच्चो को इन फूलों के बिज़नेस पे कोई विश्वास ही नहीं जमा उन्हों ने उस बाग और मकान को बेच दिया और किसी बड़े शहर में जाकर बस गए जिसका आज तक कोई अता पता ही नहीं है , हमें आज तक न ही कोई ऐसी कहानी दुबारा सुनाई पड़ी है न ही ऐसे कोई चमत्कार
अब तो ---- सिर्फ यह सोच दिल में बैठी है के क्या सच में ऐसा हो सकता है ?के गुलाब के फूल में बसी कोई आत्मा जिसका उस परिवार से कोई नाता था ?जो उसके मरने पे टूट गया ? लेकिन कुछ समझ नहीं आया सिवाय इसके की -----
ज़िन्दगी है ही गुलाबों की तरह एक अनबुझ कहानी जैसे,
संवर गई तो ठीक
वरना एक ठोकर ,बिखर जाएंगी जिंदगी की पंखुड़ी सारी