Translate

Wednesday, September 30, 2026

ADABI SANGAM -# 553_------------TOPIC GULAB -------SEPTEMBER-26-2026 By (Annu Bhanot )

"

ADABI SANGAM -# 553_------------TOPIC  GULAB -------SEPTEMBER-26-2026





उस दिन रोज मर्रा की तरह बाग़ में मॉर्निंग वाक को निकला तो वहां एक बहुत बड़ी कियारी में गुलाब के कतार में लगे हुए गुलाब के पौधे और उनपे सजे हुए रंग बिरंगे हर तरह के गुलाब के फूल 
 लाल सुर्ख गुलाब ,कोई जंगल का राजा है तो कोई पाताल का लेकिन बागों  और  रोमांटिक दिलों का राजा तो लाल  गुलाब का फूल ही है , ऐसा लोग मानते हैं।  


टहनिया झुकती हुई और तितलियाँ उड़ती हुई , छूने को दिल किया " लिखा था तोडना मना है " जी मचल के बोला पर देखना कहाँ मना है ?फिर कुछ कांटो ने स्वागत किया , यार इतने सुब्दर फूल और यह जालिम कांटे ?
कांटे सिर्फ पहरेदार नहीं इस सुंदरता के बल्कि खुश्क सर्द मौसम में यही कांटे हवा से पानी चूस कर फूलों को ताज़ा भी रखते है ,

बुरी सरिष्ट न बदली जगह बदलने से , चमन में काँटा आके भी गुलाब न हो सका , गुलाब को प्यार करने वालो कांटो से भी नाता रखना पड़ेगा

सुना है दुनिया में अब पुराना इश्क कहीं भी मिला नहीं करता
गुलाब के इत्र से महकता तो है पर शायद खिला नहीं करता


," कैसे हो भैया ? की आवाज से मैंने चौंक कर पीछे मुड कर देखा वहां कोई न था , फिर वही आवाज तुम्हारे दादा जी पिता जी सब ही तो यहाँ आते थे मैं सब को जानता हूँ , यह गुलाब का बगीचा उनकी वजह से  था उन्ही के पैसों  से।  आप तो बहुत कम आते हैं। कहीं नौकरी करते हैं ? नहीं काम ढून्ढ रहा हूँ मैंने भी बिना सोचे समझे जवाब दे दिया , कोतुहल तो यह था के आवाज कहाँ से आई थी ? शायद कोई दोस्त आसपास में होगा यही सोचकर कर मुँह से जवाब निकल गया , मैंने पलट कर देखा ,लेकिन वहां कोई भी तो नहीं था.

गुलाब और रंग नजदीक से देखने और उनकी सुगंध का आभास करने के लिए मैं थोड़ा झुका ही था केक्यारी की गीली दलदल में पैर फिसला और उसी पौधे पे जा गिरे ,कांटे चुभे ,थोड़ा खून बहा ,कपडे फटे सो अलग , हुस्न के पहरेदार भी तो होते हैं ऐसे कैसे तोड़ लोगे किसी खूबसूरत चीज़ को ? फिर वही आवाज आई 

 मुझे तो खैर कांटे जो चुभे सो चुभे , बेचारा मेरे वजन से उस पौधे का कचूमर ही निकल गया , सब टहनिया टूट गई फूल भी टूट कर बिखर गए , मेरे कपडे भी कीचड में पूरी तरह सन चुके थे , मैंने इधर उधर देखा उस बाग का माली दौड़ता हुआ मेरे पास आया , पूछ क्या हुआ साहब ? कैसे हुआ ? फूल चाहिए थे तो हम से मांग लेते। नहीं भाई ऐसा कुछ नहीं है , कुछ आवाज का भ्रम हो गया था ,


माली के जाते ही फिर आवाज आई , अब मैं तो टूट फुट गया हूँ माली मुझे कचरे में फेंक देगा , माली से कह कर आप मुझे यहाँ से ले चलो मुझे अपने घर चलना है , भाई कौन हो कहाँ से बोल रहे हो ? कौन सा घर ?  जरा गौर से सुनने की कोशिश की तो वो उस टूटे हुए गुलाब के पौधे से आती हुई जान पड़ी , मन ने कहा पौधे कहाँ बोलते हैं ? , यह क्या भ्रम है कौन फैला रहा है इसे?  ,कोई छुपा हुआ स्पीकर तो नहीं इस पार्क में ? कोई मुझे मूर्ख बना रहा है या भूत का डर दिखा रहा है? पर है कौन नजर भी तो नहीं आ रहा

आप मुझे यहाँ से ले चलो।, फिर आवाज आई, तुम आजकल बेकार हो ना? मैं तुम्हे कमाई करवाऊंगा। मैंने माली को आवाज लगाई और पूछा, भाई , तुम्हें भी कुछ सुनाई दी आवाज ? माली ने कहा, साहब, क्यों सुबह-सुबह मजाक करते हो पौधे भला क्या बोलेंगे ? तो यह टूटा हुआ पौधा अब किस काम आएगा ? कुछ नहीं, सुबह इसे निकालकर दूसरा लगाना पड़ेगा , तो यह टूटा हुआ मुझे दे दो। आप जाइए। मैंने आपका घर देखा है वहां आकर मैं लगा दूंगा।

फिर मुझे आभास हुआ जैसे कोई कह रहा हो भाई मेरी कुछ सुनते जाओ फिर वही आवाज , मैं गुलाब हूँ मेरे कई भाई भी है , हर रंग अलग ही पहचान देते है , हैरान मत होइए हमें हर कोई नहीं सुन सकता , आपकी जिंदगी में सुबह से शाम तक मैं आपका कितना साथ देता हूँ है आपको कुछ भी याद  ?,


मैंने पुछा वो  कैसे , सुबह पार्क में मेरे दर्शन करने चले आते हो ताज़ी ऑक्सीजन में मेरी खुशबू सिर्फ आपको ही नहीं कितनी ही तितलियाँ और भंवरो को खींच लाती है , वह जो शहद सुबह आप नाश्ते में लेते हो अपने स्वास्थ्य के लिए , शरीर की सुंदरता और चंचलता के लिए ?वे मक्खियाँ मेरी मिठास ही लेकर पौष्टिक शहद बनाती हैं. तुम्हें पैदा होते ही यही शहद चटाकर इस दुनिया की सबसे मीठी याद दी थी तुम्हारे पिताजी ने ?,भूल गए अपनी छट्टी का दूध और शहद की वो बूँद जो मेरे ही रस से बनी थी ?

आपने पूजा अर्चना की हवंन करवाए सब जगह मैं ही तो मौजूद था ,आपके घर में हुए हर  जनम से मृत्यु शया तक जरा सोचो कहाँ नहीं था मैं ? मैं चुपचाप सुनता रहा 

इत्र से नहीं, वफ़ा से महकता है हमारे बीच का रिश्ता
इंसान का प्यार वक्त के साथ सूख जाता है और रिश्तों को भूल जाता है
लेकिन एक गुलाब सूख भी जाए तो खुशबू नहीं छोड़ता!अखिर तक साथ निभाता है


एक गुलाब करले निबाह बेइन्ताह कांटो से ,
 पर एक आदमी ही है जो निभा न सका आदमी से,

 मौका कोई भी हो ? एक बात बताओ 
गुलाब पर ही जुल्म क्यों ढाते हैं लोग ? इश्क के इज़हार या किसी की मजार के लिए हमें ही क्यों तोड़ लाते हैं लोग ?
ज्यादा गलत फेहमी में रहते हैं यह , , अगर गुलाब देने से ही मोहब्बत हो जाती , या किसी की लाश पे गुलाब  देने से मुक्ति ? तो माली सारे शहर का महबूब न हो जाता ? मेरा सुर्ख लाल रंग तुम्हें खून की याद नहीं दिलाता ? जिस मेहबूबा को एक फूल दे दो तो कितने ही विलन पैदा हो जाएंगे तुम्हारे खून बहाने के लिए , आज तक जितने भी गुलाब लिए या दिए गए किसी एक का भी घर शांति से बसा ? 

फूल सिर्फ किताबों में सूखकर दम तोड़ गए , फूल तुम्हें भेजा है खत में फूल नहीं मेरा दिल है तो क्या उस उजड़े दिल की दुनिया उस एक फूल से  बसी ? मेरे जो गुण हैं, उन्हें कोई नहीं जानता सिवाय पुरानी पीढ़ी के, लेकिन आज की जनरेशन उनकी सुनती ही कहाँ है ? मुझे एक-दूसरे को पटाने में नष्ट किया जा रहा है मेरे सारे गुणों को अपने पांव तले रौंदते हुए आगे बढ़ जाते हैं जबकि मुझे ईश्वर ने अमरत्व का दान दिया है मेरे बीज की बजाय मेरी एक टूटी हुई शाख लगा दे मैं फिर से जिन्दा हो जाता हूँ 

मेरी सूखी पत्तियों से कितने ही तरह के सुंगधित परफ्यूम बनाये जाते है , तुम्हारी शादी की स्टेज मेरे ही फूलों से सजाई गई थी , भूल गए अपनी सुहाग रात में मुझे कितना मसल दिया था अपने बिस्तर पर बिछा के क्योंकि आपको अपने हर काम में मेरी सुगंध अच्छी लगती है ,आयुर्वेद में गुलाब गुलकंद आपके पेट की बीमारियों में एक राम बाण दवाई है , आँखें दुःख रही हों तो गुलाब जल से आँखों के रोग ठीक हो जाते है , मैं हैरानी से सब सुन रहा था मेरी आवाज मानो बिलकुल गुमसुम सी हो गई थी ( अंदर ही अंदर मेरा दिल गवाही दे रहा था के बात तो बिलकुल सच्च है , जो कभी हमने ध्यान ही नहीं दिया ,पर यह बता कौन रहा था?  कितना  बिज़नेस छुपा था इस गुलाब के एक फूल में ? मैं सोच में पड़ गया 'आवाज फिर भी आती रही -----

कीमती तोहफों से बेहतर है, किसी को एक लाल गुलाब का फूल देना , तोहफों में लाख नुक्स निकाल देंगे कीमत को लेकर यह लोग, लेकिन प्यार की निशानी लाल फूल को क्या कहेंगे ?


सुनो कि अब आज से हम गुलाब लेंगे और गुलाब देंगे
मोहब्बत में कोई अब खासरा नहीं चलेगा

मोहब्बत के बाजार में , तभी से चल पड़ा रिवाज हर मौके पर गुलाबों का आदान प्रदान और बेचारे गुलाब के बागों की शामत आ गई , बेचारे तेज नोकीले कांटे भी इंसान से इन खूबसूरत गुलाबों को बचा नहीं पाए , यह दुनिया तो ख़ूबसूरती की वैसे भी दुश्मन है ,बिज़नेस के नाम पर जहाँ देखती हैं झपटने की कोशिश करती है

मेरी सचाई के इतर लोगो के लिए गुलाब सिर्फ़ एक खूबसूरत फूल नहीं, बल्कि प्यार, खूबसूरती, एहसास और रिश्तों की गहराई का प्रतीक भी है। उन खूबसूरत भावनाओं को शब्दों में व्यक्त करने का एक शानदार तरीका है, जिन्हें हम अक्सर सीधे कह नहीं पाते। गुलाब की खुशबू और उसकी नज़ाकत को आधार बनाकर लिखी गई शायरी प्रेम, रोमांस, दोस्ती और दिल की भावनाओं को बेहद खूबसूरती से बयां करती है।लाल गुलाब अगर प्यार की निशानी है तो सफेद गुलाब शांति का प्रतीक , और काला गुलाब विद्रोह या BYCOT का अगर लोग अँधा धुंद मेरे फूलों को इतना रुतबा दे रहे हैं तो तुम भी कुछ फायदा उठा लो मुझ से 

उसने भी तो यही कहा था अपनी शादी हो जाने के बाद
"कागज़ के पन्नों में दबाकर रखी है तेरी दी हुई हर निशानी
ये सूखा गुलाब सुनाता है हमारी अधूरी मोहब्बत की कहानी!!



मेरे दिल ने जवाब दिया ,
बेशक दिलों में आग, हाथों में गुलाब रखते हैं,
मेरे चाहने वाले भी अब तो -------
अपने चेहरों पर दोहरी नक़ाब रखते हैं।

सोचो कितने गुलाब क़त्ल हुए होंगे तेरे इश्क़ को मनाने में,
के गुलशन को उजाड़ कर हुस्न को सजाया गया था
कितने शौक से दूल्हे के सर सेहरा भी मेरा ही सजाया गया था , और जब तू किसी के काम का न रहा
और फिर क्या कम बाग़ उजड़े होंगे तेरी मयद को सजाने में ?

इतना ज्ञान इस गुलाब के टूटे हुए पौधे से कैसे ?और 
सिखा रहा  है यह गुलाब मुझे जिंदगी का सलीका
कांटों के बीच रहकर भी मुस्कुराने का तरीका!?


पत्नी जोर जोर से  चिल्लाये जा रही थी , कितनी देर से उठा रही हूँ , कुम्भकरण की नींद सोये हो , मैं एक झटके में उठा आँख मलते हुए बोला ,यार क्या अजीब सपना था , गुलाबों का बाग मेरे कपडे गंदे होना , मेरा गिरना , माली से बात करना , अरे हाँ माली तो सुबह सुबह ही आया था पिताजी के बारे में पूछ रहा था और एक गुलाब का पौधा हमारे पीछे के लॉन में लगा कर गया है , पिताजी के बारे में?



अरे भाग्यवान यह क्या मिस्ट्री हो रही है , पिताजी को गए हुए भी आज बीस साल बीत चुके हैं , हम दोनों भाग कर अपने लॉन में उस पौधे को देखने आये तो वहां गुलाब का पूरा जंगल बन चूका था , एक पौधा नहीं था , अब हमें काटो तो खून नहीं , यह कोई भूतिया पौधा है क्या ?हमें डर लगने लगा। एक रात में इतना घना जंगल ? भगवान किस मुसीबत में फंस गए है हम लोग , काट के फैंको सारे गुलाब के जंगल को सुबह ही , कल ही माली को बुलाता हूँ, पार्क के ऑफिस में माली को बुलाने के लिए फ़ोन किया तो उन्होंने बताया इस नाम का माली हमारे यहां कभी था ही नहीं न ही कोई आपके घर पे भेजा गया है आपको कोई गलत फेहमी हुई है आप किसी नर्सरी की बात तो नहीं कर रहे ? 

तभी दरवाजे पर दस्तक हुई गुलाब सिंह जी घर पे हैं ? बहार एक विदेशी सज्जन खड़े थे मैंने दरवाजा खोल कर बोला "पिताजी तो बीस साल पहले ही इस दुनिया से जा चुके हैं " आप कौन और कहाँ से आये हो और आप पिताजी के दोस्त हो तो आप पहले कभी यहाँ आये हो क्या ?नहीं कभी नहीं आया 


मैं भी काफी मुसीबत में था मेरी पत्नी चल बसी , स्टोर में आग लगी , बिज़नेस में बहुत घाटा हुआ और मैं भी दिल का दौरा पड़ा बीमार पड़ गया था, सारा फूलों का बिज़नेस ख़त्म हो गया था , लेकिन insured था
क्लेम पास हुआ लेकिन आपके पिता जी की अमानत पिछले बीस साल से बैंक में रखी थी ,उनसे कोई कनेक्शन नहीं था 'इसी पैसे की वजह से मेरा काम फिर से फल फूल गया है,वो मेरे बिज़नेस पार्टनर ही नहीं भाई की तरह थे जब मेरे पास कुछ भी ना था उन्होंने मुझे उधार में फूल देकर मुझे खड़ा किया था। यह कहते हुए उसने अपनी जेब से एक लाख डॉलर का चेक निकालकर मेरे हाथ में थमा दिया ,

 यह पैसा आपके पिताजी का भी मेरे साथ फंस गया था मेरे पास आपका नया एड्रेस नहीं था सो काफी पूछताछ, पोस्ट ऑफिस से यह पता मिला तो आपसे मिलने चला आया , मैं जर्मनी में फूलों का बिज़नेस करता हूँ , तुम्हारे पिताजी गुलाब के फूलों के बहुत बड़े एक्सपोर्टर थे , हमें भेजा करते थे , बड़ी मांग है भारत के गुलाबों की वहां।


मैं उसे हैरानी से देख रहा था मेरी पत्नी को भी कुछ समझ नहीं आ रहा था , मैंने अपनी आँखे मली के यह क्या बयान हो रहा है , अचानक एक विदेशी इतना बड़ा चेक लेकर हमारे गरीब घर पे दस्तक दे रहा है जिसे न हमने कभी देखा न ही पिताजी ने कभी बताया
, मुझे तो यह कोई क्राइम थ्रिलर जैसी फील दे रहा है , हमने उसे अविश्वास से देखते हुए बोला चलो अंदर चाय पे बाकी बातें करते है , लेकिन उसने बाहर ही बैठने का आग्रह किया तो हम उसे बैक लॉन में ले गए जहाँ गुलाब के जंगल को देख उछल पड़ा अरे इतने सूंदर फूल यही तो तुम्हारे पिताजी हमें भेजा करते थे यही तो मुझे लेना है , सारा माल मुझे दे दो इसके पैसा भी आपको वापिस जर्मनी पहुँचते ही भिजवा दूंगा।


अरे, मुझे कोई चूंटी काटो, यह हकीकत कैसे हो सकता है?  एक पौधा एक रात इतना कैसे फल गया के सारा लॉन ही घिर गया ,इतना सस्पेंस तो किसी फिल्म में भी नहीं होता , ऊपर से यह चेक ?लेकिन यह चेक तो बैंक में डालने से पता चलेगा किसी विदेशी बैंक का है इसमें पैसा है भी या कोई फ्रॉड ?हमें उल्लू बना रहा है , पत्नी ने समझाते हुए बोला , इतनी देर में वह सज्जन बिना चाय पीये ही बोले मुझे बहुत काम है जल्दी वापिस भी जाना है , टेक केयर

कुछ ना बोलकर भी वो सब कुछ कह गए
जब वो हाथों में हमारा एक गुलाब लेकर, मुस्कुरा कर चल दिए !!



तीन दिन बाद बैंक मैनेजर का फ़ोन आया और बैंक में बुलाया पुछा आपका अकाउंट तो काफी समय से inoperative था इसमें इतनी बड़ी रकम का अचानक आना हमें शक पैदा कर रहा है , क्या है यह पैसा जो विदेश से आया है , हमें हेड ऑफिस को बताना है , आइये इन डाक्यूमेंट्स पर sign कीजिये और कल अपने सारे identity proof लेकर आ जाईये


दुसरे दिन हमने बैंक को सब प्रूफ दिए और एक गुलाब का फूल भी , जनाब इसी गुलाब के बिज़नेस का एक्सपोर्ट आर्डर का एडवांस मिला है यह चेक , अब हैरान होने की बारी मैनेजर की थी, ऐसा क्या है इस गुलाब में जो इतना बड़ा  एडवांस भी मिल गया ? हम क्या बोलते कोई यकीन ही न करता सो  चुपचाप उठकर चल दिए

ना कोई शिकवा, ना कोई शिकायत की, हमने भी
बस एक गुलाब उसे भी देकर दिल की हर बात कह दी!!


यह एक ऐसी घटना थी जो मेरे एक मित्र के साथ घटी जो दिल्ली के एक गांव में रहता था और उसने मुझे सुनाई ,हमने उसे मनघँडत और तिलस्मी माना लेकिन उसका गुलाबों का व्यपार खूब फैला फूला हुआ था यह तो हमें मालूम था ,उसने अपना नाम तक गुलाब सिंह रख डाला था ' लगभग ४०-४५ साल पुरानी है यह घटना ,
उसके मरने तक उसका फूलों का व्यपार बहुत बड़ा था लेकिन उसके मरते ही उन फूलों की रौनक भी ख़त्म हो गई, सब पेड़ सूख गए थे जिस चमत्कारित ढंग से वो पूरा बाग बना था उसी तरह से ख़त्म भी।  यूरोप से आर्डर आने भी बंद हो गए उसके बच्चो को इन फूलों के बिज़नेस पे कोई विश्वास ही नहीं जमा उन्हों ने उस बाग और मकान को बेच दिया और किसी बड़े शहर में जाकर बस गए जिसका आज तक कोई अता पता ही नहीं है , हमें आज तक न ही कोई ऐसी कहानी दुबारा  सुनाई पड़ी है न ही ऐसे कोई  चमत्कार


अब तो ---- सिर्फ यह सोच दिल में बैठी है के क्या सच में ऐसा हो सकता है ?के गुलाब के फूल में बसी कोई आत्मा जिसका उस परिवार से कोई नाता था ?जो उसके मरने पे टूट गया ? लेकिन कुछ समझ नहीं आया सिवाय इसके की -----


ज़िन्दगी है ही गुलाबों की तरह एक अनबुझ कहानी जैसे,

संवर गई तो ठीक
वरना एक ठोकर  ,बिखर जाएंगी जिंदगी की पंखुड़ी सारी

Thursday, September 10, 2026

August ,30 ,2026 AHSAAN & KHAT---- ADABI SANGAM----552----


AHSAAN & KHAT
ADABI SANGAM MEET BY SUBHASH ARORA on AUGUST 30,2026 at Mini Bar & Grill, 1527 Hillside Avenue, New Hyde Park.NY 11040


खुशबू जैसे लोग मिले अफ़साने में , एक पुराना खत जो खोला अनजाने में 






खत/चिट्ठियां बोलती नहीं , चुपके से पढ़ने वाले के दिल में उतर जाती हैं 
बोलना जरूरी नहीं किसी के ज़ेहन में उतरने के लिए , 
हमें महज खुद एक खत होना पड़ता है , पढ़ने वाले खुद समझ जाते हैं 

कौन करता है इंतज़ार आज कल  डाकिये का 
ख़ुशी और गम दोनों हो गए हैं डिजिटल , 
अब इन्हें मनाने के लिए कोई त्यौहार नहीं आता , 
क्योंकि अब लिफाफे में कोई खत कोई तार नहीं आता 

जरूरी नहीं हर खत मंजिल तक पहुँच ही जाए , जिसपे पते तो होते हैं लेकिन टिकट नहीं होती 
और बैरंग खतों को जेब से जुर्माना देकर कोई लेना नहीं चाहता 

मेरे प्रिय साथियों, आज काफी समय बाद मैं अपना एक खत अपने चिरपरिचित अंदाज़ में लेकर आपके सामने उपस्थित हूँ , इसे पोस्ट नहीं किया, शायद आपको कभी वक्त पे मिल ही नहीं पाता टिकट जो नहीं लगा था इस पे , इसलिए  खुद ही पढ़ के सुनाने चला आया हूँ , आशा है हमारे सुभाष जी इसे मेरी ईमानदारी से लिखा असली खत ही समझेन्गे

था वो भी एक जमाना "स्याही में डूबे कलम से लिखे लफ्ज़, कागज़ पे जब उतरते थे , वो महज़ अल्फ़ाज़ नहीं, हमारे जज़्बात हुआ करते थे ।" लोग पढ़ते थे ,रोते थे कभी जोर जोर से हँसते थे, चूमते थे खत में लिखे एक एक शब्द , कीमती मोती की तरह परखते थे 

साथियों, खत बेशक केवल कागज़ का एक टुकड़ा होता था…लेकिन हम सब के लिए वो अलग-अलग मतलब और विशेष संदेश वाहक होता था 

सालों बाद आज फिर हाथ में कलम उठाई है, खत लिखें भी तो किसको ? लेकिन  जो बातें आज के वक्त में फोन की स्क्रीन पर फीकी रह जाती हैं, उन्हें इस कोरे कागज़ पर उतारने का मन हुआ। इस ख़त का हर एक लफ़्ज़ मेरी खामोश धड़कनों की आवाज़ है। आप सब के लिए कुछ पंक्तियाँ लिखी हैं:

कागज़ पर बिखरे हैं जो लफ़्ज़ मेरे,
वो सिर्फ़ शब्द नहीं, जज़्बात हैं गहरे।
दूरी तो सिर्फ़ रास्तों की है दरमियाँ,
वरना हर साँस पर पहरे हैं तेरे।

इस कागज़ को जब तुम छुओगे/, तो महसूस करना कि यह सिर्फ़ एक कागज़ नहीं, मेरा तुम्हारे पास भेजा हुआ एक एहसास है। जब वक़्त मिले, तो जवाब ज़रूर लिखना। पढ़ कर रद्दी की टोकरी में मत डाल देना ,तुम्हारे जवाबी ख़त का इंतज़ार रहेगा।

चंद पैसों में पोस्ट ऑफिस से मिल जाता था, पूरी दुनिया का चक्कर काट कर अपनी मंजिल पे पहुँचता था , बेचारा एक गरीब सा  खत ,
कभी-कभी दिनों में तो कभी-कभी महीनों में। 

अपनी जवानी की शुरुआत में हमें भी एक शोक चढ़ा ,पूरी दुनिया को जानने के लिए , बहुत से पेन फ्रेंड बनाये  मैंने , हर देश में हर पोस्ट ऑफिस को हमने काम पे लगा रखा था , इतना शोक था हमें खत लिखने का , हर खत का जवाब कम से कम बीस दिन में आता था , और रोज गेट पे खड़े होकर डाकिये की राह ताकने में ही पूरा दिन निकल जाता था , कभी भी डिप्रेशन का नाम भी नहीं सुना था. और जब जवाब आता था तो मानो सात समुंदर पार से कोई सामने आ खड़ा हुआ है।  खत लिखने वाले की खुशबू उसमें महसूस होती थी. 

लेकिन वह लिखने वाले के दिल का आइना होता था।पढ़ने वाले भी कमतर नहीं थे, बार बार उसी  खत को पढ़ते थे  शायद कुछ बात छूठ न गई हो  ।जब हम खत लिखते थे , तो अपना समय, अपना धैर्य और अपनी रूह का एक हिस्सा उस कागज़ पर उतार देते थे। लिखते समय कभी-कभी हाथ भी कांपते थे, तो कभी खुशी या गम के आँसू उस खत के कुछ लब्ज़ मिटा देते थे। खत पढ़ने वाला केवल शब्द नहीं पढ़ता था, वह उन आंसुओं के निशान और उन कांपते हाथों की छुअन को महसूस कर लेता था और दो आंसू उसके भी निकल आते थे

प्रेम पत्र , शोक पत्र , निमंत्रण पत्र क्या क्या पत्र नहीं पढ़े हमने
इंतज़ार का वो मीठा दर्द: आज के 'इंस्टेंट इंटरनेट डिलीवरी' सोशल मीडिया के ज़माने में हमने वो 'इंतज़ार' का सुख ही नहीं खोया बल्कि अपना सकून भी खो दिया है। एक समय था जब डाकिए का इंतज़ार हमारी दिनचर्या का एक जरूरी हिस्सा होता था। खत भेजने के बाद जो जवाब की प्रतीक्षा होती थी, उसमें एक अलग ही कशिश थी। छत की मुंडेर पर अचानक आ बैठे कौवें की कावं कावं को खत या किसी सन्देश के आने का इशारा मान लेते थे 

कितना हसीं होता था मोहब्बत का भी वो पुराना जमाना , उनके लिखे हुए वो खत अपनी किसी डायरी में छुपाना 

 शायर मिर्ज़ा ग़ालिब ने इस इंतज़ार और खत की अहमियत को कुछ यूँ बयां किया है:

"क़ासिद ( डाकिया) के आते-आते, ख़त इक और लिख रखूँ,
मैं जानता हूँ ,जो वो लिखेंगे जवाब में।"

इतना लम्बा था इंतज़ार की जवाब भी खुद लिखने को दिल करता था
उस एक खत में किसी माँ के लिए सरहद पर खड़े बेटे की कुशलता होती थी, तो किसी का अंतिम संदेश 


बरबस दिल ख़ुशी से उछल पड़ता, था " चिठ्ठी आई है वतन से चिट्ठी आई है " किसी पत्र में छुपा  महबूब का अक्स होता था, तो किसी बहन के लिए भाई का प्यार। किसी में भैया दूज या रक्षाबंधन का पैगाम

यादों की अलमारी में  बड़े संजोय थे मैंने भी अपने कुछ खुश खत ,और सूखे फूल: खतों की सबसे बड़ी खासियत यह थी कि वे सहेजे जाते थे। आज हम फोन की मेमोरी फुल होने पर व्हाट्सअप मैसेजेस डिलीट कर देते हैं, क्योंकि और नए संदेशे आने बंद हो जाते है ,लेकिन खतों को पुरानी किताबों के पन्नों के बीच, संदूकों में, रेशमी कपड़ों में सहेज कर रखते थे उनके लिए जगह कभी कम नहीं पड़ती थी । कभी-कभी यही किताबें और दो चाहने वालो को , सबकी नजरो से छुपा कर प्रेम पत्रों  का  आदान-प्रदान, हमारे खत भी बखूबी अपनी मंजिल पर पहुंचा देती थीं। कुछ महान लोग तो इन पुराने पत्रों की किताबें छपवा कर, उन्हें बेच पैसा भी कमा जाते थे.

खत जो लिखा मैंने इंसानियत के पते पर , डाकिया ही चल बसा , कभी जवाब ही नहीं आया 
आज कल बड़े लेटर्स to  एडिटर्स अखबारों में छपाये  जाते हैं जिन्हे पूरी दुनिया पढ़ती है पर वो शायद नहीं पढता जिसके लिए लिखे जाते है 


हैं कुछ "सूखे गुलाब और वो पुराने से कुछ खत, आज भी मेरी अलमारी को महकाया करते हैं।" जिनका कदरदान सिवाए मेरे कोई और नहीं, न फेकने को दिल करता है न जलाने का , सालों में जब कभी होली दिवाली में अलमारी की सफाई करता हूँ तो अपने उन पत्रों को वापिस एक बार फिर पढ़ कर वापिस उसी युग में पहुँच जाता हूँ , और सोचने लगता हूँ कितना भोला था मैं भी जो ऐसे खत लिख डालता था ?

जब सालों बाद वो पीले पड़ चुके खत अचानक किसी पुरानी किताब से गिरते हैं, तो वो अपने साथ उस पूरे बीते हुए दौर को फिर से ज़िंदा कर देते हैं। उनमें से गुज़रे हुए वक़्त की और उस गुजरे हुए  इंसान की खुशबू आती है।जिसके साथ यह खतौ किताबत हुआ करती थी

आज हम व्हाट्सएप, फेसबुक और ईमेल के युग में जी रहे हैं। तकनीक ने दूरियों को तो खत्म कर दिया है, लेकिन उसी के साथ  दिलों के फासले भी बढ़ा दिए हैं। स्क्रीन पर चमकते हुए नीले (Blue Tick) और काले अक्षर सन्देश पढ़े जाने की सूचना तो दे सकते हैं, लेकिन भावनाएं जताने की नहीं। 


"अब तो पलक झपकते ही पैगाम पहुंच जाते हैं, मगर इंतज़ार की वो मीठी तड़प अब कहाँ मिलती है! मैसेज के दौर में लफ्ज़ तो मिल जाते हैं, पर खतों वाली वो रूहानी महक अब कहाँ मिलती है!"

दुनिया चाहे कितनी भी तेज़ रफ़्तार क्यों न हो जाए, अपने हाथों से कुछ लिखने का सुकून कभी पुराना नहीं हो सकता।लिए अदबी संगम मुझे वो कमी पूरी करने का पूरा अवसर दे रहा , मैं खत लिखता हूँ और खुद ही पढ़ कर सुंनाने चला आता हूँ  , डाकिये का झंझट ही ख़तम अब तो शादी व  जन्मदिन के निमंत्रण भी  व्हाट्सऐप पर आने लगे हैं 

मेरा दिल आज भी करता है किसी को एक खत लिखूँ, पर लिखूँ किसको? पढ़ने वाला ही कहाँ बचा है इस दुनिया में , पढ़ भी लेगा तो जवाब नहीं देगा अलबत्ता फ़ोन करके जतायेगा भाई कौन सी दुनिया में जी रहा है आज भी पत्र लिख रहा है ? मोबाइल नहीं है क्या ?

फिर भी इस सारी  बेड़िओं को तोड़ते हुए मेरा यह मानना है के , कभी कभी हम अपने किसी बहुत करीबी दोस्त, रिश्ते को   अपने हाथ से लिखा हुआ एक खत ज़रूर भेज के देखें । यकीन मानिए, जब वो उस कागज़ को छुएंगे, तो उन्हें उसमें आपकी धड़कन सुनाई देगी, वो उसे संभाल कर रखेगा किसी भी कारण से । जवाब भले ही न दें दिल से दाद जरूर देंगे।


"लौट आओ दोस्तों ,कि फिर से एक बार वो दौर जिएं हम, 
तुम खत लिखो और हम बेसब्री से डाकिये का ----इंतज़ार करें।"
















































yaado se juda










ख़त (Khat) – पुरानी यादों के नाम
प्रिय,
आज अचानक अलमारी साफ़ करते हुए तुम्हारी दी हुई वो पुरानी डायरी हाथ लग गई, और बस यादों का एक पूरा कारवां आँखों के सामने तैर गया। वो पुराने दिन, वो हँसना-हंसाना, और वो छोटी-छोटी बातें—वक़्त भले ही आगे बढ़ गया है, पर वो लम्हे आज भी मेरे दिल के एक कोने में वैसे ही महफ़ूज़ हैं।
तभी इस कागज़ पर कुछ पंक्तियाँ खुद-ब-खुद उतर आईं:
वक़्त की धूल में खो गए वो ज़माने,
पर आज भी ज़िंदा हैं यादों के अफ़साने।
तुम दूर हो तो क्या हुआ ऐ दोस्त,
दिल की धड़कन आज भी लगती है तुम्हें बुलाने पर।
यह ख़त सिर्फ़ एक संदेश नहीं, हमारे बीते हुए उन हसीन दिनों की एक छोटी सी झलक है। सच कहूँ तो उन दिनों की बहुत याद आती है। जब भी तुम्हें वक़्त मिले, मुझे अपनी ख़ैरियत ज़रूर लिखना।
पुरानी यादों और ढेर सारे प्यार के साथ,