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Tuesday, January 28, 2025

JANUARY-25 ,2025--- ADABI SANGAM-- MEET # 536- TOPIC ---BLACK & WHITE---HOSTED BY ---ANU---AT AANCH --

                       BLACK & WHITE


   JANUARY-25 ,2025---  ADABI SANGAM-- MEET # 536- TOPIC ---BLACK & WHITE---HOSTED BY ---ANU---AT AANCH



 उसे तो और भी बहुत चाहिए अपनी न बुझने वाली तृष्णा की शांति के लिए   

               तभी तो सब लगे है सफ़ेद को काला और काले को सफेद करने में

                         दीखता तो है साफ़ बहुतं ,काली सिहाई से लिखा सफ़ेद कागज पर 
                                                              अलबत्ता 

उसे क्या कहें जिसे हर काला अक्षर भैंस ही नजर आता हो 





रंगीन खवाब देखने से क्या फायदा , जो आँख खुलते ही अपना रंग बदल लें ?
सपने वो देखो चाहे हों, ब्लैक एंड वाइट पर जिंदगी की हकीकत बताते  हों 

काला और सफेद: यूँ तो इन रंगो का इस्तेमाल और मायने युगो युग से चला आ रहा ,एक समयहीन विरोधाभास है ,हमारे जीवन में ,लेकिन यह रंग निर्धारित  इंसानो में काले गोरे की चमड़ी और फिर रंग भेद में कैसे बदल गया ? क्यों किसी मार्टिन लूथर किंग को काले लोगों के लिए जिन्हे किसी ने नीग्रो कहा किसी ने हब्शी ? को सड़क पर उत्तर कर अपने हक़ के लिए सड़को पे आंदोलन करना पड़ा ? किसने कब और क्यों यह भेद भाव शुरू किया होगा ? 

इतिहास के गर्भ  में दबी है इसकी कहानी।  फॉरेंसिक साइंस और DNA  RNA sequencing से यह पाया गया के सबसे पहला इंसान बहुत लम्बी सदियों से चली आ रही कुदरत के विकास और एक जीव का दुसरे रूप में बदलते जाना जिसे योनियां कहा गया ,और चौरासी लाख योनियां पार  करके पहला आदम और होवा ( ADAM & EVE ) वनमानुष के रूप में अफ्रीका में पैदा हुआ जो खुद भी एक बन्दर योनि  से बना था , एक योनि विकसित होकर दूसरी नई योनि को जनम जरूर देती है पर खुद नष्ट नहीं होती वो भी आपके साथ साथ चलती रहती है , आज भी रेड इंडियंस , mayans civilisations के सबूत मेक्सिको और कनाडा में जीवित है 

हज़ारों सालों की यह प्रिक्रिया है एक योनि से दूसरी योनि में प्रवेश होन। अफ्रीका काफी गर्म और तेज धुप की वजह से यहाँ के लोग मेहनती तो थे पर तेज धुप और गर्मी की वजह से  लेकिन बहुत काले थे। यह सब जानते है के शरीर का और बालों का रंग शरीर में कितना मेलानिन नाम का रसायन बन रहा है उसपे निर्भर करता है , यह सब कुदरत का खेल है जैसे जैसे आप सूरज की तीखी किरणों से दूर होते जाएँगे आपका मेलेनिन जो त्वचा का और बालों का  रंग  निर्धारित करता है। चूँकि धरती लगभग वीरान पड़ी थी सिर्फ अफ्रीका को छोड़ कर क्योंकि यहीं की प्रस्थितियाँ और उनके खाने पीने के साधन प्रचुरता से उपलभ्द थे। इसलिए मानव भी यहीं पर पैदा हुआ , आज भी अफ्रीका के लोग इतने रफ़ और टफ है जैसे कोई एनिमल स्ट्रेंग्थ 

लेकिन हर वक्त एक जैसा नहीं रहा किसी आपदा वश ,उन्हें अपनी जान बचाने और भोजन की तलाश में पूरी दुनिया को खंगालना पड़ा और इस तरह अफ्रीका में उतरा आदम और ईव पूरी दुनिया में फलना फूलना शुरू हुआ।  जैसे जैसे उनके रहने का वातावरण बदला गर्म सर्दी  वाली हर नई पीढ़ी का रंग भी मौसम के अनुकूल होने लगा नैन नक्श ,बालों का रंग उस इलाके की जरूरत के हिसाब से खुद बी खुद बनने लगे। हमारे शरीर में कई  प्रकार के अलग अलग  केमिकल्स की वजह से चमड़ी का रंग भी  सूरज की गर्मी और दूरी की वजह से बदलने लगा ,
जो काले चमड़ी वाले लोग अफ्रीका से ठन्डे इलाको में आ गए हज़ारों वर्षों के शरीर में हुए बदलावों से  उनका रंग ढंग सब बदल गया और आगे भी यह evolution बदस्तूर चालु है , जरूरत के हिसाब से शरीर के नैन नक्श , रंग , शरीर की कद काठी सब बदलने लगी 

अब यहीं से शुरू हो गया रंग भेद , गोरी चमड़ी वाले खुद को ज्यादा खूबसूरत और कालों को पिछड़ा और बदसूरत मानाने लगे , जबकि रिसर्च से निकली असलियत तो यही थी की गोरों का जनम इन्ही काली जाती के लोगों से ही हुआ है , यह  रंग ों का द्वेष आज तक भी चला आ रहा है , लोगों को सड़को पर उतर कर (black lives matters ) चिल्लाना पड़ता है। गोरो ने खुद को सबसे ऊपर कैसे समझना शुरू किया ? क्योंकि भू मध्य रेखा से जैसे जैसे ऊपर चलते जाए लोगों के रंग बदलते जाएंगे , नार्थ पोल तक पहुँच कर तो रंग बिलकुल ही बर्फ जैसा हो जाता है।
यही उनकी गलतफहमी का राज बना के अपनी जड़ो से दूर आकर अपनी जड़ो से ही नफरत और भेद भाव करने लगे। 
 

अब इस विषय को रंगो के उपलक्ष में भी देखते है 
काला और सफेद, दो रंग जो हमारे जीवन में अनंत काल के समय की शुरुआत से जुड़े हुए हैं। ये दो रंग विरोधाभास के प्रतीक हैं, यानी के एक दुसरे के विरुद्ध मतलब है इनका ,लेकिन फिर भी वे एक दूसरे को पूरी तरह से पूरक बनाते हैं। 
काला रंग ,अंधकार, शैली , रहस्य सस्पेंस अनहोनी  का प्रतीक है, जबकि सफेद शुद्धता, निर्दोषता और स्पष्टता का प्रतीक है।

कला की दुनिया में, काला और सफेद ने मिलकर कुछ सबसे प्रतिष्ठित और समयहीन कलाकृतियों को बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। पिकासो की काली और सफेद पेंटिंग्स से लेकर अन्सेल एडम्स की मार्मिक तस्वीरों तक, ये दो रंग कई कलाकारों के लिए पसंदीदा माध्यम रहे हैं।

सिनेमा फोटोग्राफी में, काला और सफेद अक्सर भावना को व्यक्त करने और एक कहानी को फ़्लैश बैक में  सुनाने के लिए उपयोग किया जाता है। रंग की अनुपस्थिति दर्शक को विषय के अभिव्यक्ति, बनावट और स्वर पर ध्यान केंद्रित करने की बाध्यता  देती है। हेनरी कार्टियर-ब्रेसन और रॉबर्ट कैपा की प्रतिष्ठित तस्वीरें काले और सफेद फोटोग्राफी की शक्ति का प्रमाण हैं।

अगर फैशन की बात करें तो :---
फैशन में, काला और सफेद एक क्लासिक संयोजन है जो कभी भी शैली से बाहर नहीं जाता है। छोटी काली पोशाक से लेकर क्रिस्प सफेद शर्ट तक, ये दो रंग हर वार्डरोब में मौजूद होते हैं।
वकीलों का काला ओवर कोट-सफ़ेद पैंट  ,अदालत में सफ़ेद झूठ को सच साबित करने में लगे रहते है   , और डॉक्टर्स का सफ़ेद एप्रन ओवर कोट , आपके दिल के कालेपन की वजह से पैदा हुई विभिन बीमारिया  आप ही की काली कमाई से आपको दागमुक्त करने में लगे रहते है । है न काले और सफ़ेद का अटूट बंधन ?


जीवन में, काला और सफेद मानव अनुभव की द्वैतता का भी प्रतीक हैं। हम आनंद और दुःख, प्रेम और हानि, विरोध और विजय और पराजय का अनुभव करते हैं। काला और सफेद हमें याद दिलाते हैं कि जीवन हमेशा सीधा और एक सामान नहीं होता है,

अगर निष्कर्ष में कहना चाहूँ तो यही कहूंगा के , काला और सफेद सिर्फ रंग नहीं हैं; वे जीवन के लिए एक अति आवश्यक रूपक हैं

है जिंदगी में हमारी लाखों रंग ,रंग बिरंगी साड़िया और सूट ,पर सबकी जननी यही दो रंग हैं।  जिधर भी जितने भी रंग दीखते है, देखो असलियत में  बने हैं सिर्फ काले और सफ़ेद के मिलने से. हैरान मत होना यही विज्ञानं है 

एक दुसरे के उलट  होते हुए भी बहुत याराना है काले और सफ़ेद के बीच में ( black & white ) जिन्हे लोग अक्सर रंग समझने की भूल करते है वो असल में दिन का उजाला और घनी रात की कालिमा के  बीच का समय  है। हर सफ़ेद उजाले के बाद गहरी काली रात आती है। इन्ही दोनों के बीच के समय में ही बसी हैं हमारी रंगीन दुनिया ,
है दोनों का अटूट रिश्ता एक दुसरे के कान में कहते है , तू चल तो मैं आया।

इनके अघाड़ रिश्ते की एक लम्बी कहानी है
सफ़ेद कागज पे लिखने को काली सिहाई की कलम , बड़ी बड़ी किताबें छप गई इन्ही दो रंगों में ,गोरे गोरे मुखड़े पे काला काला चश्मा और लो सज गया हुस्न , किसी के गोरे मुखड़े पे लगा कुदरती काला तिल , न जाने कितनो को घायल कर गया ,आँखों में लगा काला काजल ,किसी को कटार सी धार दे गया तो किसी  ने अपनी उम्र छुपाने को अपने सफ़ेद बालों को ही काला कर लिया। तो जब कुछ भी न सुझा ,  काला रंग पसंद था तो किसी ने अपनी करतूतों से कर लिया  ,अपना ही मुहं काला  ,

खुदा खैर करें ,जवानी की क़यामत , सूंदर गोरे मुखड़े पे ,रेशमी काली जुल्फों के फ़साने ,बेशुमार इनपे बने फ़िल्मी गाने ,किसी का दिल ही न टूट जाए इन्हे सुन सुन कर ।इस ब्लैक एंड वाइट की जुगलबंदी देख के ,काले चश्मे में न ही काली आँखें नज़र आई न ही दिल के टूटने की आवाज , ऐसा पर्दा डालते है यह दोनों एक दुसरे पे। गोरे गोरे  मुखड़े पे कजरारी काली काली आँखें क्या बवाल ढाती हैं किसी मजनू से पूछो। कहीं नजर न लग जाए चाँद से मुखड़े पे एक नजर भटू काला टीका तो जरूरी है , , 


इन्दर धनुष के सात रंग भी इन्ही की देंन है जो बारिश की बूंदों से बने वायुमंडल में सूरज की किरणों से अलग अलग दिखने लगते है

बड़े कसीदे पढ़ते हैं हम रंगीन नज़ारों के लेकिन असल में वह सब सफ़ेद और काले ही हैं , सफ़ेद रंग ही सबसे पवित्र रंग है जिसमे सारे रंगों का समावेश है , सात रंगों से मिलकर बनता है सफ़ेद रंग जिसे हम सब ने अपनी स्कूल की किताबों में पढ़ा था। फिर भी वह रंग नहीं सब रंगों की माँ है जैसे ही सूरज की रौशनी या कोई भी रौशनी इसपर पड़ती है तो सब रंग उकरने लगते हैं 

अगर यही सच है तो क्या जब श्वेत स्याम ( ब्लैक & वाइट ) फिल्मे बना करती थी तो हमारी आँखें उसमे वो रंग क्यों नहीं देख पाए जो आज देख पा रहीं हैं ? यही सवाल सबके दिलों  में उठा ,क्या समझे ? 

दोस्तों यही है एक केमिकल लोचा , दोनों प्रकार की फिल्मों के बनावट में और उनमे इस्तेमाल किये गए रसायनो में ही बहुत फर्क था. दोनों के केमीकल्स प्रकाश को अलग अलग तरीके से प्रवर्तित करके हमारे रेटिना पर पड़ते है और रेटिना के करोडो सूक्ष्म सेल्स उन रंगों को वापिस करके आपको रंगीनियत का अहसास कराते हैं ,

 जिंदगी तो तब भी रंगीन थी जब फिल्मे ब्लैक एंड वाइट बनती थी सिर्फ हमारे पास उसे रंगीन दिखाने के साधन अब आये है। गोया रंग तो सिर्फ वही है जो रौशनी हमें दिखाती है वरना इसी सफेदी में छुपे है सातो रंग और जब रौशनी ख़त्म तो सारे रंग हमें ब्लैक ही नजर आते है

इसमें निहित छोटे छोटे अणु अपनी अपनी विसात से उस प्रकाश को प्रवर्तित यानी के रिफ्लेक्ट कर देते है जिसे हमारी आँखें हर रंग को अलग अलग रूप से पहचान लेती है यह खासियत सिर्फ उस कुदरत की दी हुई  आँखों के रेटिना में है जो रंगों को ऐसे अलग अलग कर के दिखा पाता है। 

डॉक्टर ने कहा  तुम्हारी आँखों में सफ़ेद मोतिया बिंद है इसलिए सब काला दिखने लगा है  , दुसरे ने कहा काला मोतियाबिंद है इसलिए कुछ नहीं दीखता , वरना है तो सब सफ़ेद ही यानी के वाइट। यह सुन कर कुछ मेरे मित्र  हैरान तो होंगे , पर है तो यही हकीकत 


कुछ बच्चे गली में सड़क पर पटाखे जला रहे थे,
अभी एक पटाखे में चिंगारी लगाई ही थी कि सामने से पड़ोसन भाभी आती दिखी
सभी बच्चे चिल्लाने लगे, बचके ,भाभी पटाखा हैं
भाभी पटाखा हैं
भाभी मुस्कुराई और बोली- नही रे पगलो अब पहले जैसी बात कहां...अब तो मेरे बाल ही सफ़ेद हो गए हैं , काली डाई लगाई है अब मैं जवान कहाँ ,गोया काळा अगर सफ़ेद होने लगे तो उम्र दराज की देहलीज़ है।  बहरहाल भाभी जी इस पठाखे के मर्म को ही नहीं समझ पाई और बह गई अपनी ही काली सफेद दुनिया में 


इन्ही रंगो में ही समाई है हमारी जिंदगी भी ,इसके भी वही अय्याम हैं कभी धूप यानी के सफ़ेद उजाला और कभी छावं यानी के काला अँधेरा। हैं अगर कामयाब इस दुनिया में तो सब तरफ है वाह वाही वरना ,आपकी एक गलती गिरा देती है आपको दूसरों की नजरों से और लगा देती है आपके गोरे मुखड़े पे लानत की काली सिहाई।

इन गोरे गोरे  लोगों को  तो देखो अपने दिल के काले पन को कैसे छुपा जाते हैं एक सफ़ेद झूठ बोल कर 
पत्नी ने कहा ---------- तुमने मेरे साथ धोखा किया है?
पति----सकपकाते हुए , क्यों जानेमन क्या हुआ? मैंने तो जिंदगी भर तुमसे कभी झूठ नहीं बोला 
पत्नी- --------तुमने बताया क्यों नहीं कि तुम्हारी रानी नाम की पहले से एक पत्नी है
पति- मुस्कुराते हुए -----ससुर जी को बताया तो था कि तुझे बिल्कुल रानी की तरह रखूंगा...


पर चिंता किस बात की अगर है आपकी करोडो की कमाई , आप ने जैसे भी हो कमाई ?
वो काली थी या सफ़ेद थी , किसी ने आज तक ,मुहं पे पूछने की हिम्मत ही नहीं जुटाई
क्योंकि काला हो या सफ़ेद हैं तो दोनों ही सगे भाई भाई. 

हाँ मगर जेब में पैसा न होना ही है ,आज की बहुत बड़ी बुराई
काले पैसे को सफ़ेद और सफ़ेद पैसे को लोग अक्सर रंगों की लीपा पोती करते रहते हैं
मन के काले पन को तो धो नहीं पाते , पर लगती है बहुत आसान उन्हें, अपने काले धन की धुलाई।रंग लगे न फिटकरी बस करते रहते हैं अँधा धुंद काली कमाई 


रंग भले ही देखने में सुन्दर लगते है पर बात की सचाई तो ब्लैक एंड वाइट ही होती है , या तो वो झूठ या होगी सचाई , हाँ लोग इस लिए सफ़ेद झूठ भी बोल लेते है जो होता तो काला झूठ है लेकिन लगता सच है

अब मैं अपने दिल का क्या करूँ -------
मुझे नहीं आकर्षित करतीं यह आज की दौड़ती भागती थकी हारी रंगीन जिंदगियां,
मुझे तो बस वही याद है ,वही पसंद है अपनी वही ब्लैक एंड व्हाइट जिंदगी, वही ब्लैक एंड वाइट कैमरा जिसमे मैं अपनी यादें संजोया करता था 
जिसमे से ही निकले थे मेरे यह रंगीन सपने

वो जो मेरे घर के बुजुर्ग थे , जो मेरी आंख खुलने से पहले,
सुबह सुबह पूरा अखबार पढ़ लिया करते थे ,
वही सफ़ेद कागज पे छपे काले अक्षर , सारी दुनिया की खबर रखते थे

उनके सिर के पक चुके सफेद बाल मुझे आकर्षित करते थे ,जो बिना डाई के भी उनके सांवले चेहरे पे खूब खिलते थे
एक-एक बाल में सिमटा होता था ,जैसे दशकों का इतिहास,
उनकी कहानियों में झलकती थी हकीकत से भरी ,ब्लैक एंड व्हाइट जिंदगी,


मैं नहीं होता था कभी लाल या  पीला, उनकी बातों पर
 
थी ब्लैक एंड व्हाइट,  लेकिन मुझे बना देती थी ज्यादा समझ दार 

उन कहानियों में अपने किरदार को ढूंढता हुआ, अपने आज के रंगीन युग में खुद को खोजता हुआ ,पापा की जवानी की ब्लैक &वाइट तस्वीर में अपने आप को खोजता हुआ, बहुत दूर आ गया हूँ 

दुनिया के गिरगिट की तरह बदलते रंग देखने के बाद, मुझे अब बहुत पसंद आने लगा है ब्लैक एंड वाइट जो सदियों में भी ,कभी नहीं बदला

जब जब मैं थक जाता हूं, तो आंखें मूंद लेता हूं, सपनो में देखता हूँ अपनी गुजारी हुई उम्र
उसी में दिखती है मुझे अपनी खोई हुई ब्लैक एंड व्हाइट जिंदगी, फिर याद आने लगते है कुछ रंगीन लम्हे। 


आज का आदमी आदमी से मिलता है, बहुत सोच सोच कर
फिर भी दिल मगर किसी से 
मिलता  नहीं , बेइंतेहा सोच सोच कर 

..जीवन का रंग अगर सफेद है   ,फिर मृत्यु का रंग क्यों काला है
काली वह राख जो बनी , गोरे जिस्म के जलाने पर
अन्तिम सत्य की तरह दहक कर, काली  क्यों हो गई ?

मैंने इस पर बहुत सोचा   कि ऐसा क्यों होता है
जीवन के अनेक ऐसे पल जिसमें ,एक पक्ष उजाला और दूसरा पक्ष अँधेरा ?
 जैसे सफ़ेद  धूप और काली छाव?
जैसे उजला दिन और रात काली 

लेकिन मेरे दिल ने कहा जीवन में ,मृत्यु अगर एक अंतिम सत्य है 
तो अंतिम सत्य काला कैसे हो सकता है? मेरी अंतर आत्मा ने खुद से ही जवाब दे दिया 

बरखुरदार ,यह काली राख तो तेरी काली करतूतों से जख्मी शरीर की है , 
आत्मा तो शाश्वत श्वेत निर्गुण थी , वो न जलती है न मरती है वो तो इस नाशवान कलंकित  शरीर को छोड़ ब्रह्म विलीन हो जाती है